गुरु की महिमा

By Shivani Hingle

(05/09/2020 19:30IST)

जोबनाए हमें इंसान, जीवन में दे सही गलत की पहचान, महान गुरुओं को शत -शत प्रणाम।।

गुरु शब्द में 'गु' का अर्थ है 'अंधकार' और 'रु' का अर्थ है 'प्रकाश अर्थात् गुरु का अर्थ हुआ अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला मार्गदर्शक'।

गुरु दो प्रकार के होते है एक आधात्मिक (धार्मिक )और एक शिक्षक। ये दोनों ही हमें ज्ञान की और ले जाते है। आधात्मिक गुरु हमारी अंतर आत्मा की शुद्धि करते है और शिक्षक हमें ज्ञान की और ले जाते है। सही शिक्षक वही है जो बच्चे की योग्यता को पहचाने और उनको इस और बढ़ावा दे। हमारे शिक्षक हमें शैक्षणिक दृष्टी से तो बेहतर बनाते ही हैं साथ ही हमारे ज्ञान तथा विश्वास स्तर को बढ़ाकर नैतिक रुप से भी हमें अच्छा बनाते है। जीवन में अच्छा करने के लिये वह हमें हर असंभव कार्य को संभव करने की प्रेरणा देते हैं।

हर वर्ष हम 5 सितंबर को हमारे बहुमूल्य शिक्षकों को सम्मान देने के लिए शिक्षक दिवस मानते है । यह दिन एक विधार्थी तथा शिक्षक के लिए बहुत ख़ास है । गुरु शिष्य की परंपरा आदिकाल से चली आ रही है , इस संसार में जिसने जन्म लिया उसने अपने जीवन में गुरु धारण किया जैसे की भगवान कृष्ण , भगवान राम इत्यादी । गुरु और शिक्षक का रिश्ता अटूट है ।

हमारे माँ - बाप हमारे सबसे पहले गुरु है जो हमें जन्म देने के साथ अच्छी शिक्षा तथा पालन पोषण देते है ।शिक्षक हमें ज्ञान की और ले जाते है , वह हमें जिंदगी को एक नए तथा सही ढंग से जीना सिखाते है। वह हमारे भविष्य को उज्जवल बनाते है। हमारा जीवन शिक्षा के बिना अधूरा है। शिक्षा हमारी जिंदगी में ऑक्सीजन का कार्य करती है जैसे एक व्यक्ति को जीने के लिए ऑक्सीजन की ज़रूरत होती है, वैसे ही हम सबको शिक्षा की आवश्यकता है । यह कार्य एक निस्वार्थ शिक्षक ही कर सकता है। एक सच्चा शिक्षक जानता है की हर विधार्थी में अपार क्षमता है । वह विधार्थी के अंदर छुपी क्षमता को पहचान कर उसकी कला को और निखारता है । हमें अपने शिक्षकों का सम्मान करना चाहिए।

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Shivani Hingle

Winning Participant of 'Celebrating Our Gurus'

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