हमारे-आपके प्रेमचंद

By Vasundhara Pande

(4/08/2020 00:30IST)

धनपत राय, सुनते ही किसी धन्ना सेठ की याद आ जायेगी, जिसके पास ऐशो-आराम, नौकर-चाकर, संपत्ति की कमी नहीं. परन्तु हमारे धनपत राय आपकी अवधारणा से भिन्न हैं| धनपत राय उर्फ़ हमारे और आपके प्रेमचंद | प्रेमचंद नाम अधिक लोकप्रिय हैं, इसका श्रेय भी इनकी कहानियों को जाता हैं | प्रेम और सहजता से कहानी सुनाने वाले प्रेमचंद हर मध्य स्कूली बच्चे की पुस्तक में पाए जाएंगें , परन्तु इनकी कहानिया जीवन के हर एक पहलु से जुड़ी | इनकी कहानिया का अपनापन ही हैं जो हर वर्ग, आयु तथा लिंग की ज़ुबानी कहलाती जाती हैं | ज़्यादातर कहानियां ग्रामीण परिवेश को भली भाति दर्शाते हुए गरीब और अमीर के फरक पर व्यंग्य कस्ती हैं | व्यंग्य एक ओर हसाता हैं तो दूसरी ओर सोच के कील पर नवविचारों का हथोड़ा ठोकने पर मजबूर कर देती हैं | कष्ट और पीड़ा का वर्णन दिल दहला देता हैं, नहीं मानते? तो कफ़न ही पढ़ लिजिए| धर्म सम्बंधित बातों को भी प्रेमचंद की खस्सणियो ने अपनाया ,जैसे ईदगाह | तो वही "नमक का दरोगा " जैसी कहानियों की सहायता लेते हुए सुविचारों और अच्छे आचरणों से बच्चो को सुशिक्षित किय। अंग्रेजी में कहे तो "मोरल साइंस" जो हर समय की मांग हैं | कहानियों की भूमिका की विविधता को ध्यान मेजन रखते हुए प्रेमचंद ने यह अवश्य सुनिश्चित किया की उनकी हर एक कहानी का समा हमारे दिमाग में कैद हो जाए | जैसे - जैसे हम कहानी पढ़ते हैं ऐसा प्रतीत होता हैं की सारे पात्र सजीव हैं, अपनी असलियत खो बैठ, पाठक प्रेमचंद की दुनिया में रम जाते हैं, पात्रो का एक-एक लफ्ज़ मुँह से पढ़ा जाता हैं और दिमाग में उनकी आवाज़ किसी मधुर संगीत की धुन की तरह बजना शुरू हो जाती हैं | ना ही प्रेमचंद जी ने क्रिएटिव राइटिंग में तालीम हासिल की और न ही वह साहित्यकारों के खानदान का अंश थे, परन्तु फिर भी कहानीकारों का दर्जा उन्हें न देने से मर्ज नाकाबिलियत ही सिद्ध होगी | यद्यपि उन्हें कहानीकारों का खानदान कहने मेजन कोई अतिश्योक्ति नहीं |

मैं प्रेमचंद जी की कहानियां चौथी कक्षा से पढ़ती आयी हूँ | पुस्तकालय से जारी की गयी मेरी पहली हिंदी की उपन्यास प्रेमचंद जी की रचना "गोदान" ही थी| कुछ इस तरह उन्होंने मेरे दिल में घर कर लिया और मेरा विश्वास है की उनके बारे में पढ़कर उन्होंने आपका मन भी मोह लिया होगा, और अगर नहीं तो दोस्त अब भी देर नहीं हुई है, प्रेमचंद की से मुलाकात काफी सरल हैं, उनकी कहानिया आपकी प्रतीक्षा करते- अमर हो गयी हैं!

About Authors.

Vasundhara Pande

Editor In Chief (INARA)

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