सत्ता का सिंहासन

By Yuvraj Sinha

(22/11/2020 00:30IST)

दिल्ली के केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन पर लगा ये बोर्ड ये बताता है की आप इस वक़्त विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के केंद्र में मौजूद हैं। लेकिन विडम्बना देखिये, बोर्ड पर लिखा है "रायसीना हिल…सत्ता का सिंहासन"। ये बताता है की हमारे देश की सरकारें ये बात मान कर बैठी हुई है की वो "ताकत" की कुर्सी पर लोगों पर "शासन" करने के लिए हीं बैठी हैं। ये छोटी सी चीज़ हीं ये दिखाने के लिए काफी है की हमारी सरकारों (केवल केंद्र नहीं) की अपनी स्थिति को लेकर क्या मनोस्थिति है। इसलिए, अगर हम एक मज़बूत लोकतंत्र बन्ना चाहते हैं तो हमारी सरकारों को ये बात समझनी होगी की वो उस "गद्दी" पर वो भारत की जनता पर "शासन" करने के लिए नहीं बल्कि लोगों की सेवा करने के लिए बैठीं हैं। उन्हें ये बात माननी होगी की सरकारों का काम लोगों के हितों की रक्षा करना है, न की अपने हित्तों की रक्षा करना। उन्हें ये समझना होगा की भारत की जनता उन पर शासन करती है। और ये बात लोगों के अचेतन मन में पहुंचना भी ज़रूरी है ताकि लोग अपने-आप को सरकारों से ताकतवर माने। ऐसे बोर्ड्स जैसी चीज़ें लोगों के अवचेतन को काफी हद तक प्रभावित करते हैं और उन्हें बताते हैं की वो शासित हैं। इस सोच में भारी सुधर की ज़रुरत है। और हाँ, केवल बोर्ड पे शब्द बदल देने से भी कुछ नहीं होने वाला, सरकारों और जनता को इस बात को अपने मन और मस्तिष्क में सही मायनों में डालना भी होगा और मन्ना भी होगा।। ताकि "रूलिंग पार्टी" "रूलर" नहीं "सर्विंग पार्टी" बने।

About Authors.

Yuvraj Sinha

Managing Editor

Comment Box is loading comments...